बिना नाम वाला दस्तावेज़

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आंद्रेई सखारोव, 1975:
नोबेल शांति पुरस्कार स्वीकारते हुए भाषण

4 दिसंबर 2007

1975 में नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान करते समय दिया गया भाषण

शांति, प्रगति एवं मानवाधिकार

1975 में नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान करते समय दिए गए भाषण से उद्धृत अंश

नॉर्वेजियन संसद की नोबेल समिति ने 1975 में आंद्रेई सखारोव को नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया।

शांति के लिए सखारोव के व्यक्तिगत एवं साहसिक प्रयास, उन सभी लोगों के लिए प्रेरणादायक हैं जो शांति को बढ़ावा देने में रुचि रखते हैं। बिना किसी समझौते एवं अथक प्रयासों के, सखारोव ने न केवल सत्ता के दुरुपयोग एवं मानवीय गरिमा के उल्लंघन के विरुद्ध लड़ाई लड़ी, बल्कि न्यायपूर्ण समाज के निर्माण हेतु भी प्रयास किए।

अपने भाषण में सखारोव ने यह भी कहा कि व्यक्तिगत मानवाधिकार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एकमात्र आधार हैं। उनके इस विचार का महत्व अत्यधिक है; मुझे विश्वास है कि सूचना की स्वतंत्रता, विचारों की स्वतंत्रता एवं लोगों के अधिकारों का सम्मान, अंतरराष्ट्रीय सहयोग हेतु आवश्यक हैं।

आंद्रेई दिमित्रिविच सखारोव ने विश्व के सभी लोगों को शांति एवं न्याय का संदेश दिया। उनके अनुसार, विश्व शांति तभी संभव है जब वह व्यक्तिगत अधिकारों के सम्मान पर आधारित हो। इसी आधार पर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय घोषणाओं में मानवाधिकारों का उल्लेख किया गया है। सखारोव ने सभी देशों से इन घोषणाओं का पालन करने का आह्वान किया।

हेलसिंकी में आयोजित सुरक्षा सम्मेलन में 35 देशों ने मानवीय गरिमा के सम्मान पर सहमति व्यक्त की। इससे यह स्पष्ट होता है कि मानवाधिकारों का सम्मान, अंतरराष्ट्रीय सहयोग हेतु आवश्यक है।

आंद्रेई सखारोव ने मानवीय भाईचारे एवं शांतिपूर्ण सहअस्तित्व पर विश्वास व्यक्त किया। उनके अनुसार, विश्व शांति तभी संभव है जब सभी देश मानवाधिकारों का सम्मान करें।

शांति, प्रगति एवं मानवाधिकार – ये तीनों एक-दूसरे से अविभाज्य हैं। इनमें से किसी एक को भी नजरअंदाज करना असंभव है। यही मेरे भाषण का मुख्य विषय है।

नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त करने पर मुझे अत्यधिक प्रसन्नता है। मैं नॉर्वेजियन संसद की नोबेल समिति का भी आभारी हूँ। उन्होंने मानवाधिकारों के सम्मान को अंतरराष्ट्रीय सहयोग हेतु आवश्यक बताया। यह विचार मेरे लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। मुझे विश्वास है कि सूचना की स्वतंत्रता, विचारों की स्वतंत्रता एवं लोगों के अधिकारों का सम्मान, अंतरराष्ट्रीय सहयोग हेतु आवश्यक हैं।

आज मैं शांति, प्रगति एवं मानवाधिकारों संबंधी कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करूँगा। सबसे पहले, मैं ऐसी अंतरराष्ट्रीय समिति के गठन का प्रस्ताव करता हूँ जो निरस्त्रीकरण, मानवाधिकारों एवं पर्यावरण संरक्षण संबंधी मुद्दों पर कार्य करे। मेरे विचार में, ऐसी समिति को सभी सरकारों से सटीक जानकारी प्राप्त करने का अधिकार होना चाहिए। ऐसी समिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा एवं सहयोग हेतु एक महत्वपूर्ण संस्था बन सकती है। मुझे आशा है कि इस विचार को समर्थन मिलेगा एवं इस पर चर्चा होगी।

मैं यह भी कहना चाहता हूँ कि संयुक्त राष्ट्रों के लिए सैन्य बलों का अस्तित्व अत्यधिक महत्वपूर्ण है; ऐसे बलों का उपयोग राष्ट्रों एवं जातियों के बीच संघर्षों को रोकने हेतु किया जा सकता है।

संयुक्त राष्ट्रों के लिए मानवाधिकारों का सम्मान अत्यधिक महत्वपूर्ण है। हेलसिंकी समझौते में इस बात पर सहमति व्यक्त की गई है। मुझे आशा है कि इस समझौते के प्रावधानों को व्यवहार में लाया जाएगा।

निरस्त्रीकरण संबंधी वार्ताओं में, हमें सभी देशों के बीच समानता सुनिश्चित करनी होगी। ऐसा करने से ही विश्व शांति संभव है।

मैं यह भी कहना चाहता हूँ कि निरस्त्रीकरण हेतु अंतरराष्ट्रीय समझौते आवश्यक हैं। ऐसे समझौतों से ही विश्व शांति संभव है।

अंत में, मैं यह कहना चाहता हूँ कि शांति, प्रगति एवं मानवाधिकार – ये तीनों एक-दूसरे से अविभाज्य हैं। इनमें से किसी एक को भी नजरअंदाज करना असंभव है। यही मेरे भाषण का मुख्य विषय है।